जब नाव गंगा नदी में डूबने लगी थी तो उस में सवार लोग तो बचाने के लिए चिल्ला ही रहे थे, किनारे खड़े लोग भी उन के बचाव के लिए चिल्लाने लगे थे. अचानक नाव में तेज हलचल हुई और उस में लगे इंजन से धुआं उठने लगा था. इस के बाद नाव 2 टुकड़ों में बंट गई थी. उस में बैठी सवारियों में जो लोग तैरना जानते थे, वे तैरने लगे थे. बाकी लोग जान बचाने के लिए शोर मचाते हुए हाथपैर चला रहे थे.

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