उस दिन 12वीं कक्षा का गणित का पेपर था. एक इन्विजिलेटर ने एक छात्र को नकल करते रंगेहाथों पकड़ लिया. इस पर पहले तो नकलची छात्र उस इन्विजिलेटर से बहसबाजी करने लगा, फिर गुस्से में आ कर उस ने अपनी उत्तरपुस्तिका फाड़ कर फेंक दी. इस के बाद वह छात्र अपनी दादागीरी दिखाता परीक्षा कंट्रोल रूम में गया, जहां प्रिंसिपल भी मौजूद थे. उस ने संबंधित इन्विजिलेटर का गरीबान पकड़ा तथा उन के साथ बदसलूकी की. प्रिंसिपल बीचबचाव करने आए तो छात्र उन्हें धमकाता हुआ बोला, ‘‘अपने इन्विजिलेटर्स को समझा दें कि मुझ से पंगा न लें. आप जानते नहीं मैं कौन हूं. चाहूं तो एक मिनट में आप सब का ट्रांसफर करा दूं. यदि मेरा नकल प्रकरण बना कर भेजा गया, तो मैं किसी को छोडं़ूगा नहीं. उस इन्विजिलेटर को तो मैं ऐसा सबक सिखाऊंगा कि ताउम्र याद रखेगा.’’

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