फिल्म ‘नो एंट्री’ में अनिल कपूर का किरदार जब भी किसी मुश्किल हालात में फंसता था तो वह पैनिक होने के बजाय बी पौजिटिव कहता था. इस से उस के न सिर्फ बिगड़े काम बनते थे, बल्कि एक हास्य भी पैदा होता था. फिल्म में बी पौजिटिव के फलसफे को भले ही हंसीमजाक की चाश्नी में लपेट कर दिखाया गया हो लेकिन असल जिंदगी में अगर युवाओं को बेहतर भविष्य की कल्पना करनी है तो यही एटिट्यूड काम आता है. युवावस्था अकसर कई तरह के भ्रम पैदा करती है, जिस से भविष्य की राह मुश्किल लगने लगती है. ऐसे में किस तरह एक बेहतर भविष्य की बुलंद इमारत के लिए सफलता की नीव रखी जाए, आइए जानते हैं :

हमेशा सकारात्मक सोचें

कहते हैं, ‘जहां चाह वहां राह.’ जीवन में सफलता का पहला फौर्मूला यही है कि आप हमेशा आशावादी रहें, क्योंकि इस नजरिए से हर कठिन काम को पलभर में हल कर सफलता हासिल की जा सकती है. जीवन में आगे बढ़ने के लिए कौशल विकास के साथसाथ सकारात्मक सोच का होना भी जरूरी है. अकसर नकारात्मक रवैए के चलते आत्मविश्वास डगमगा जाता  है. जो व्यक्ति अपनी सोच व अपनी मानसिक दशा को हमेशा सकारात्मक रखता है उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. जैसे ही हमारे मन में किसी प्रोजैक्ट या फ्यूचर प्लान के लिए नैगेटिव थौट्स आने लगते हैं तो हम अपने सफल भविष्य की मंजिल से उतनी ही दूर चले जाते हैं. जीवन में आगे बढ़ने के लिए कौशल विकास के साथसाथ सकारात्मक सोच का होना भी जरूरी है. आशावादी बनें, नकारात्मक विचार कभी मन में न लाएं. नकारात्मक विचारों से आत्मविश्वास कम होता है, अत: हमेशा आशावादी दृष्टिकोण ही अपनाएं. 

जोखिम उठाने का जज्बा

नो रिस्क नो गेन यानी बिना जोखिम के कुछ भी हासिल करना संभव नहीं होता. भविष्य उस का ही संवरता है जो लीक से हट कर कुछ नया और बड़ा अचीव करने के लिए जोखिम उठाता है. लकीर के फकीर बने रहने से बेहतर और सफल भविष्य की मंजिल तक नहीं पहुंचा जा सकता. युवा पीढ़ी क्रिएटिव को कानून के दायरे में रहते हुए जोखिम उठाने की क्षमताओं को विकसित करना होगा. एक छोटा सा जोखिम आप की सफलता में बड़ा बदलाव ला सकता है. जोखिम लेना हर किसी के बस की बात नहीं है. उस के लिए कौन्फिडैंस की जरूरत होती है. विश्वास में वह शक्ति है जिस से उजड़ी दुनिया में प्रकाश लाया जा सकता है.

अकसर जोखिम न लेने वाले यह तर्क देते हैं कि इस राह में फेल होने के अवसर बढ़ जाते हैं, लेकिन याद रखें असफलता का मतलब है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं किया गया. असफलता किसी काम को दोबारा शुरू करने का एक मौका देती है कि उस काम को और अच्छे तरीके से किया जाए. जब आप यह निश्चय करते हैं कि चाहे कुछ भी हो, कितनी भी मेहनत करनी पड़े लेकिन मुझे अपना लक्ष्य हासिल करना है तो यह जोखिम आप के सुनहरे कल की तस्वीर प्रस्तुत करता है.

खुद करें अपना मूल्यांकन

सफलता का पहला नियम यही है कि जिस काम में मन न लगे वही पहले करना चाहिए. वैसे भी जिस विषय या क्षेत्र में आप को महारत हासिल हो उस में भविष्य बनाने से कामयाबी का प्रतिशत बढ़ जाता है. काम यदि आप की रुचि अनुसार होता है तो आप उस में अपना 100त्न देते हैं. बिना अपना मूल्यांकन किए कोई काम करना वैसा ही है जैसे बिना गहराई का अंदाजा लगाए नदी या तालाब में कूदना.इसलिए सब से पहले यह पता लगाएं कि आप को क्या करना अच्छा लगता है और उसी काम को करें. अपनी शक्ति या सामर्थ्य का हमें पता होना चाहिए. हमेशा लक्ष्य ऐसा चुनें, जो अपनी शक्तिसामर्थ्य में हो. कभी भी ऐसा लक्ष्य चुनने की गलती न क रें, जो स्वयं की सामर्थ्य से बाहर हो. उदाहरण के लिए किसी की रुचि विज्ञान या तकनीक में है तो उसे कला सब्जैक्ट लेने से बचना चाहिए. अगर जबरदस्ती कोई और राह चुनेंगे तो असफलता ही हाथ लगेगी.

नया विचार नई क्रांति

आने वाले कल की बेहतरी के लिए आज की युवापीढ़ी अपने भविष्य के लिए क्या विचार या सोच रखती है, इस बिंदु पर सफलता और असफलता टिकी होती है. नए विचार व नई योजनाएं अपनाने में घबराएं नहीं. नए विचार नई क्रांति को जन्म देते हैं. नए विचार व नई योजनाएं सफलता की धुरी होते हैं. आजकल की प्रतिस्पर्धा और भागदौड़ भरी जिंदगी में पुराने विचारों की कोई पूछ नहीं है. नई पीढ़ी अपने नए विचारों से दुनिया भर में अपनी सफलता का परचम लहरा रही है. फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग हों या कोई अन्य  सफलतम युवा उ-मी, सब ने नए आइडिया के दम पर दुनिया को अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है.

युवाओं को चाहिए कि वे हमेशा अच्छा सोचें. ज्यादातर अपनी मंजिल या लक्ष्य इतना कम सैट करते हैं कि बाद में पिछड़ जाते हैं, जबकि कुछ लोग बहुत बड़ा लक्ष्य  और बेहतर भविष्य पाते हैं. वह समय बीत गया जब युवा किसी भी दफ्तर में क्लर्क की नौकरी कर के खुश हो जाते थे. अब वे अपना भविष्य बेहतर बनाने के लिए खुद अपने आइडिया के दम पर अपनी कंपनी के मालिक बनते हैं और सफलता की राह में बहुत जल्द बड़ा नाम बन जाते हैं.

असफलता, गलतियां और संकल्प

जीवन में संकल्प हमें सफल बनाता है. हमारे कैरियर, स्कूल या दोस्ती में कई मनमुटाव या छोटीमोटी लड़ाइयां चलती रहती हैं, लेकिन हम उन्हें किस तरह से सुलझा कर अपनी सफलता के असली संकल्प को पूरा करते हैं, यही एक भावना सफल भविष्य की इमारत बुलंद करती है, यही हमारी सफलता को भी सुनिश्चित करती है. असफलता से घबराने के बजाय अपने लक्ष्य तक पहुंचने का संकल्प जरूरी है. सफलता हमारा परिचय दुनिया से करवाती है और असफलता हमें दुनिया का परिचय करवाती है. सफलता की राह पर अग्रसर होते हुए कुछ निराशात्मक बातें हमारे सामने आती हैं, यदि हम उन बातों पर ध्यान न दे कर सिर्फ अपने लक्ष्य के बारे में सोचते हैं तो हमें सफलता जरूर मिलती है.

गलती करना बुरी बात नहीं है, लेकिन उन से कुछ सबक न सीखना और बारबार उन्हें दोहराना जरूर सफलता की राह में रोड़े पैदा करता है.  आप गलतियों से तभी सीख सकते हैं जब अपनी उन गलतियों को स्वीकार करते हैं और उन पर मनन करते हैं.सदैव कड़ी मेहनत करें. ईमानदारी, सकारात्मक ऊर्जा से असफलता का डट कर मुकाबला करें. सिर्फ और सिर्फ सफल और सुनहरा भविष्य आप का इंतजार करता नजर आएगा.                             

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