फिल्म ‘नो एंट्री’ में अनिल कपूर का किरदार जब भी किसी मुश्किल हालात में फंसता था तो वह पैनिक होने के बजाय बी पौजिटिव कहता था. इस से उस के न सिर्फ बिगड़े काम बनते थे, बल्कि एक हास्य भी पैदा होता था. फिल्म में बी पौजिटिव के फलसफे को भले ही हंसीमजाक की चाश्नी में लपेट कर दिखाया गया हो लेकिन असल जिंदगी में अगर युवाओं को बेहतर भविष्य की कल्पना करनी है तो यही एटिट्यूड काम आता है. युवावस्था अकसर कई तरह के भ्रम पैदा करती है, जिस से भविष्य की राह मुश्किल लगने लगती है. ऐसे में किस तरह एक बेहतर भविष्य की बुलंद इमारत के लिए सफलता की नीव रखी जाए, आइए जानते हैं :

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