हाथों में लाठी, डंडा, फरसा, चाकू और अनेक धारदार हथियारों के साथ बच्चे, बूढ़े, जवान व औरतें गेहूं की फसल को रौंदते हुए ऐसे आगे बढ़ रहे थे, जैसे पूरा गांव किसी हमले की तैयारी में हो. उन के साथ कुछ लोग पीछे उलटी खटिया पर फूलमालाओं से लदे एक शख्स को बिठा कर आगे बढ़ रहे थे. पीछे बैंडबाजे की आवाज पर लोग थिरक रहे थे. सब से पीछे पुलिस के आला अफसरों के साथ भारी पुलिस बल चल रहा था. पता चला कि उस गांव के देवता के नाराज हो जाने से गांव के ऊपर प्रेतात्मा का साया मंडराने लगा था, क्योंकि उन के गांव के देवता को दूसरे गांव के लोग चुरा ले गए थे. लिहाजा, इस गांव के लोग दूसरे गांव वालों से अपने ग्राम देवता को छुड़ाने जा रहे थे.

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