धर्म के तथाकथित पैरोकारों की धार्मिक भावनाएं इतनी खोखली और बचकानी हैं कि आएदिन फिल्मों से आहत हो कर कच्चे घड़े की तरह फूट जाती हैं. संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘...राम-लीला’ को ले कर हिंदू संगठनों ने बवाल दरअसल धार्मिक भावनाओं के चलते नहीं बल्कि धर्म के धंधे पर चोट पहुंचने की वजह से किया. धर्म की खाने वाले खौफजदा हैं कि कहीं राम के नाम पर चल रही उन की दुकानदारी ठप न हो जाए. क्या है पूरा मामला, बता रहे हैं जगदीश पंवार.

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