सावन की शिवरात्रि के दौरान करोड़ों की तादाद में बमबम भोले का शंखनाद करने वाले कांवडि़यों का हुजूम देश की सड़कों पर ऊधम मचाता हुआ नजर आता था, पर इस बार ऐसा क्या हुआ कि न केवल कांवडि़यों की संख्या बहुत कम नजर आई बल्कि उन को मुफ्त का माल परोसने वाले धर्म के धंधेबाजों में पहले जैसे जोश का अभाव भी नजर आया?

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