Science and Religion: धर्म का सिद्धांत है कि ईश्वर ने इंसानों को बनाया और उन्हें धरती पर छोड़ दिया. इसके उलट एवोलुशन का सबसे अहम सिद्धांत यह है कि प्रकृति किसी जीव को पहले से तय योजना के तहत नहीं बनाती. एवोलुशन की प्रक्रिया में कोई अंतिम लक्ष्य नहीं होता. वातावरण बदलता है, भोजन बदलता है, जलवायु बदलती है और उन्हीं के अनुसार जीवों में छोटे-छोटे बदलाव होते हैं. लाखों वर्षों में यही बदलाव नई प्रजातियां बना देते हैं. यही एवोलुशन है जो धर्म के सिद्धांतों से जरा भी मेल नहीं खाता.
अभी हाल ही में उत्तरी केन्या की सूखी धरती पर हुई एक खोज ने एवोलुशन के सिद्धांत को एक बार फिर से सही साबित किया है. यहाँ इंसानी पूर्वजों के लगभग 14 लाख साल पुराने पैरों के निशान मिले हैं. यह सिर्फ मिट्टी पर पड़े निशान नहीं हैं. ये हमारी अपनी कहानी के असली पन्ने हैं. ऐसी कहानी जिसे किसी राजा ने नहीं लिखा, किसी धर्मगुरु ने नहीं सुनाया और किसी धर्मग्रंथ में दर्ज नहीं हुआ बल्कि यह कहानी धरती ने लाखों साल तक संभाले रखी जिसे आज विज्ञान ने पढ़कर सुनाया.
शोधकर्ता केविन हटालाकी की टीम ने हाल ही में इंसानी इतिहास को और करीब से समझने की दिशा में बड़ी खोज की है. उन्हें केन्या में जो पैरों के निशान मिले हैं वो पैरंथ्रोपस बोइसेइ नाम की प्रजाति के हैं. यह आदिमानव लगभग 23 लाख साल पहले से 12 लाख साल पहले तक पूर्वी अफ्रीका में रहता था. यह मानव विकास की उस शाखा का आखिरी केंडिडेट था जो आगे चलकर खत्म हो गई. इस खोज ने एक बार फिर से साबित किया कि एवोलुशन कोई कल्पना नहीं बल्कि ऐसा वैज्ञानिक तथ्य है जिसके सबूत हर नई खोज के साथ और मजबूत होते जा रहे हैं.
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