त्योहारों में मूक व असहाय जानवरों की बलि चढ़ाने का रिवाज है. इन दिनों कसाइखानों से ले कर मंदिरों की चौखट में खून ही खून बिखरा नजर आता है. ‘अहिंसा परमो धर्म’ के विचाराधारा वाले इस देश में धर्म का सिर्फ एक ही काम है, वह है खून बहाना. कभी पूजापाठ की पीठ पर सवार हो कर तो कभी आतंकवाद की शक्ल में धर्म ने मानवता को खून से लथपथ कर दिया है.

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