सवाल

मेरी उम्र 43 वर्ष है और मैं 2 बच्चों का पिता हूं. पत्नी का देहांत 8 वर्ष पहले ही हो गया था. बेटी की उम्र 19 वर्ष और बेटे की 21 वर्ष है. दोनों की परवरिश में कोई खास दिक्कत नहीं आई क्योंकि मां की मौत के बाद बच्चे उम्र से पहले ही बड़े हो गए. लेकिन जब से बेटी का कालेज में दाखिला हुआ है तब से उस के व्यवहार में काफी बदलाव आने लगा है. उसे घूमने फिरने की मंजूरी न देने पर वह झगड़ने लगती है. ऐसे में अकसर मैं और मेरा बेटा दोनों ही उस से खिन्न हो उठते हैं और उस पर चिल्ला देते हैं. उस का दिनप्रतिदिन बढ़ता गुस्सा और अपनी बातें मनवाने की आदत चिंता का विषय बना हुआ है. कृपया मार्गदर्शन करें कि आखिर करें तो करें क्या?

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जवाब

इस उम्र में बच्चों का जिद्दी और गुस्सैल होना लगभग आम बात है. स्कूल के अनुशासित माहौल से निकल कर कालेज का नया आजाद माहौल युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. नए दोस्तों के साथ घूमनेफिरने, कालेज के उन्मुक्त वातावरण के आगे वे घर में दम घुटने जैसा महसूस करने लगते हैं. समय के साथसाथ मिजाज में परिवर्तन आता है. आप अपनी बेटी को थोड़ा समय दीजिए. आप का उस पर चिल्लाना या उसे डांटना किसी भी तरह से परेशानी का हल नहीं, बल्कि इस से वह आप दोनों से ही तटस्थ होती जाएगी. आप का बेटा उस का हमउम्र है, उसे अपनी बहन को समझने की, उस से बात करने की कोशिश करनी चाहिए. आप दोनों यदि मिल कर उस से उस के इस तरह के व्यवहार का कारण पूछेंगे, तो अवश्य ही वह आप से बात करेगी. यकीन मानिए, बात करने से रिश्ते सुधर सकते हैं.

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