मोदी आरएसएस के लिए शिवलिंग पर बैठे उस बिच्छू की तरह हैं जिसे न हाथ से हटाया जा सकता है और न ही चप्पल से मारा जा सकता है. अगर हाथ से हटाया तो बुरी तरह काट लेगा.

यह बात कहने को तो पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने कही लेकिन उनकी ही मानें तो दरअसल में यह सूक्ति वाक्य श्रुति और स्मृति परम्परा के तहत उनसे एक पत्रकार ने कही थी और उस पत्रकार से भी यह बात आरएसएस के एक सदस्य ने कही थी. यानि असल तकलीफ जो भी है संघ की है इसके लिए शशि थरूर को ही क्यों चुना गया यह बात जरूर काबिले गौर है. बेंगलुरु में अपनी ही एक किताब के बारे में चर्चा करते करते शशि थरूर मोदी जी की तरफ इस दिलचस्प तरीके से मुड़े तो बात इत्तेफाक की तो कतई नहीं लगती.

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