मोदी आरएसएस के लिए शिवलिंग पर बैठे उस बिच्छू की तरह हैं जिसे न हाथ से हटाया जा सकता है और न ही चप्पल से मारा जा सकता है. अगर हाथ से हटाया तो बुरी तरह काट लेगा.

यह बात कहने को तो पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने कही लेकिन उनकी ही मानें तो दरअसल में यह सूक्ति वाक्य श्रुति और स्मृति परम्परा के तहत उनसे एक पत्रकार ने कही थी और उस पत्रकार से भी यह बात आरएसएस के एक सदस्य ने कही थी. यानि असल तकलीफ जो भी है संघ की है इसके लिए शशि थरूर को ही क्यों चुना गया यह बात जरूर काबिले गौर है. बेंगलुरु में अपनी ही एक किताब के बारे में चर्चा करते करते शशि थरूर मोदी जी की तरफ इस दिलचस्प तरीके से मुड़े तो बात इत्तेफाक की तो कतई नहीं लगती.

इस खुलासे का सार जो पिछले कुछ दिनों से गरमा रहा है वह इतना भर है कि अब नरेंद्र मोदी और संघ की केमेस्ट्री गड़बड़ाने लगी है. आम चुनाव सर पर हैं और भाजपा के पास उपलब्धियों के नाम पर कुछ खास है नहीं जिन्हें बताकर दोबारा सत्ता हथियाई जा सके. ऐसे में आरएसएस को अगर राम मंदिर की चिंता होने लगी है और वह कट्टर हिंदूवादी छवि वाले उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आगे ला रहा है तो यह न केवल राजनीति में बल्कि देश भर में भी उथल पुथल के संकेत हैं.

बात जहां तक शशि थरूर के बयान की है तो उसमें कुछ तकनीकी खामियां तो हैं मसलन शिवलिंग पर बिच्छू नहीं बल्कि सांप विराजता है, वह भी पूरे ठाठ से और लोग उसकी पूजा भी करते हैं. उसे जूता चप्पल नहीं दिखाते. दूसरे अगर बिच्छू शिवलिंग पर चढ़ ही गया है तो उसे हटाने दूसरे कई तरीके भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. इनमें सबसे अच्छा और सुरक्षित है हाथों में दास्ताने पहनकर उसे हटाना. शिवलिंग की पवित्रता बनाए रखने दास्ताने गंगा जल से धोये जा सकते हैं.

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