Nicobar Island: अंडमान-निकोबार में ग्रेट निकोबार आइलैंड है. यह यूनेस्को बायोस्फियर रिजर्व है, जहां घने जंगल, कोरल रीफ और अनोखी बायोडाईवर्सिटी मौजूद है. ग्रेट निकोबार इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना के नाम पर यहां लगभग 92 हजार करोड़ रुपए की लागत से अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसशिपमैंट पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर प्लांट बनाए जाने की योजना है. इस योजना के तहत लाखों पेड़ काटे जाएंगे और कई ट्राइबल लोग बेघर हो जाएंगे, इसलिए इस परियोजना का लगातार विरोध हो रहा है.

हाल ही में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ग्रेट निकोबार का दौरा किया और इस परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 10 लाख पेड़ काटे जाएंगे लेकिन असली आंकड़े तकरीबन 1 करोड़ या उस से ज्यादा पेड़ों के कटने का है. इस मेगा प्रोजैक्ट के तहत 130 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जंगल की कटाई होनी तय है. गलाथिया बे में पोर्ट बनाने के लिए ड्रैजिंग होगी, जिस से कोरल रीफ, मैंग्रोव और सीग्रास बेड बरबाद हो जाएंगे. यह इलाका लेदरबैक कछुओं का नैस्टिंग साइट है. इस परियोजना से ऐसे कई जीवों की पूरी प्रजाति के नष्ट हो जाने का खतरा बढ़ गया है. इस के अलावा इस इलाके की कोरल रीफ तबाह होगी जो तूफान और सुनामी से नैचुरली सुरक्षा देती है. इस द्वीप पर सैकड़ों एंडेमिक प्रजातियां हैं जो केवल यहीं पाई जाती हैं. इन में पक्षी, सरीसृप और कई तरह के स्तनधारी जीव शामिल हैं. जंगल कटने से इन में से कई प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म हो सकती हैं.

इस द्वीप पर हजारों साल से शोम्पेन आदिवासी और निकोबरी समुदाय रहते हैं. इस परियोजना से उन के जंगल, जल और जमीन पर खतरा मंडराने लगा है क्योंकि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत लगभग 3.5 लाख से ज्यादा लोग इस जगह आ कर बसना शुरू होंगे. सरकार का कहना है कि कोई जबरन विस्थापन नहीं होगा और ट्राइबल रिजर्व के नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी लेकिन लोकल लोगों और पर्यावरण की चिंता करने वाले लोगों को सरकार पर भरोसा नहीं है.

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