कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बारह दिवसीय कैलाश मानसरोवर यात्रा उनके उत्साह या धार्मिक आस्था की नहीं बल्कि एक हताशा का प्रतीक है.  मुमकिन है यह दिखावा या पाखंड ही हो जैसा कि भाजपा आरोप लगा रही है लेकिन यह जो भी है उससे खुद राहुल गांधी, कांग्रेस या देश का भला होने वाला नहीं बल्कि इससे कई नुकसान जरूर हैं जो शायद ही राहुल गांधी को दिखें. अंधी श्रद्धा ज्यादा आत्मघाती होती है या दिखावटी यानि राजनैतिक श्रद्धा यह तय कर पाना कोई आसान काम नहीं लेकिन यह जरूर साफ दिख रहा है कि जिस तरह महंगा सूट और बूट पहनकर नरेंद्र मोदी जवाहर लाल नेहरू नहीं हो गए, उसी तरह मंदिर मंदिर जाकर राहुल मोदी यानि प्रधानमंत्री नहीं हो जाने वाले.

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