नजरें लक्ष्य पर... कोशिश चुनाव साधने की... चुनौती बिखरे संगठन को एकजुट रखने की... सहज-आत्मीय माहौल... चेहरे पर मुस्कान... कोई तल्खी नहीं... सधी आवाज और बातचीत एकदम अपनों जैसी... इन विशेषताओं के साथ आखिर प्रियंका गांधी वाड्रा भारतीय राजनीति के मैदान में उतर ही पड़ीं. सालों से पर्दे के पीछे रह कर काम करने वाली प्रियंका को राजनीति में प्रत्यक्ष उतारने की मांग बहुत लंबे समय से हो रही थी, मगर निजी कारणों का हवाला देकर इतने सालों तक उन्हें इससे अलग रखा गया. एक तो उनके बच्चे छोटे थे और दूसरा भाई राहुल गांधी का करियर डांवाडोल था. अब ऐसे वक्त में उनकी एंट्री हुई है, जब बच्चे भी समझदार हो गये हैं और राहुल गांधी भी ‘पप्पू’ वाली छवि तोड़ कर बतौर पार्टी-अध्यक्ष कांग्रेस की झोली में तीन राज्यों की सरकारें डाल चुके हैं.

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