मशहूर कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की एक मार्मिक कहानी ‘ईदगाह’ का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहस्योद्घाटन किया कि उन्हें उज्ज्वला योजना की प्रेरणा इस कहानी से मिली जिस में एक बच्चा हामिद मेले से मिठाई के बजाय चिमटा खरीद कर ले जाता है जिस से उस की दादी के हाथ रोटी बनाते वक्त न जलें.

प्रेरणा वह भी साहित्य से लेना बुरी बात नहीं है लेकिन इस में पारदर्शिता का होना जरूरी है. नरेंद्र मोदी ने अपने इंगलैंड प्रवास के दौरान भी उज्ज्वला का जिक्र किया था लेकिन उस वक्त वे हामिद प्रसंग को भूल गए थे. चूल्हे पर रोटी सेंकती मांबहनों की गरीबी उन्हें याद रही थी. खुद अपनी पूर्व गरीबी का रोना भी उन्होंने बदस्तूर रोया था.

गरीबी भले ही, बकौल राहुल गांधी, एक मानसिक अवस्था हो पर प्रेरणा का चलायमान होना अच्छी बात नहीं. अच्छा तो यह रहा कि नोटबंदी जैसा घातक प्रयोग कर चुके नरेंद्र मोदी ने मांओं के हाथ जलने से बचाने के लिए फायरप्रूफ दास्तानों की बात नहीं की.

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