उन्नाव कांड और कठुआ कांड पर समूचा देश सकते में है. जो गुस्सा निर्भया बलात्कार मामले में देखा गया, वैसा ही आक्रोश देशभर में उबल रहा है. घटनाओं के विरोध में महिला संगठन, छात्र संगठन और सामाजिक संगठन सड़कों पर कैंडल मार्च कर रहे हैं. जगहजगह धरना दे कर पीडि़ताओं को न्याय दिलाने की मांग की जा रही है. दोनों अमानवीय घटनाओं में सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा अपराधियों के बचाव में खड़े हो कर न्याय की राह में आड़े आने का रवैया हैरान कर देने वाला था. अपराधियों के साथ भगवा सत्ता और हिंदू संगठनों के समर्थन का खतरनाक रूप सामने आया है. शुरू में भाजपा सरकार की जिस तरह से जयजयकार हो रही थी, 4 वर्ष होतेहोते अब उस के प्रति लोगों में आक्रोश देखा जाने लगा है. सरकार कई मोरचों पर असफल रही है. क्या भाजपा से सत्ता संभल नहीं रही है? देश में अराजक तत्त्वों का बोलबाला बढ़ रहा है और सरकार उन के आगे असहाय बनी दिख रही है. तमाम मंत्रालय निकम्मे साबित हो रहे हैं.

COMMENT