साल 2009 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने ‘दलितब्राह्मण’ समीकरण को सामने रख कर चुनाव लड़ा था. तब उसे मनचाही कामयाबी नहीं मिली थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा अपने पुराने मुद्दों पर वापस जाती दिख रही है. लखनऊ के कार्यकर्ता सम्मेलन में बसपा नेताओं ने कहा, ‘मंदिरों में ताकत होती तो लोग मंदिर छोड़ कर मुख्यमंत्री नहीं बनते. ताकत केवल राजनीति में होती है, इसलिए अपनी ताकत पहचानो और उस का इस्तेमाल करो. उमा भारती और दूसरी साध्वी राजनीति कर रही हैं और हम को कहा जा रहा है कि मंदिर जाओ. हमारी पार्टी की मुखिया मायावती ही जीवित देवी हैं. हमारा रिजर्वेशन कांशीराम और मायावती के चलते ही सुरक्षित है.’ ये मुद्दे 2007 से पहले बसपा उठाती रही है.

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