पांच सौ और हजार के नोटों को बंद करने के सात दिनों के बाद भी आम जनता की परेशानियां बदस्तूर जारी हैं. शनिवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देशभर में करीब दो लाख एटीएम मशीनों को सुचारू रूप से संचालित होने में तीन हफ्तों का समय लग सकता है. रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक भाषण देते हुए जनता से 50 दिनों तक मुश्किलें बर्दाश्त करने का आह्वान किया. काला धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि गरीब पृष्ठभूमि से आने के कारण वे जनता की दिक्कतों को समझ रहे हैं.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि कालेधन की समस्या से निपटने के लिए कड़े कदम जरूरी हैं और मोदी सरकार से जनता को उम्मीदें भी हैं. परंतु, किसी भी बड़ी पहल को अमलीजामा पहनाने से पहले उससे जुड़े तमाम पहलुओं पर समुचित तैयारी भी आवश्यक है. पुराने बड़े नोटों की वापसी और उनकी जगह नये बड़े नोट लाने के निर्णय के बाद से बैंकों में भारी भीड़ है. एटीएम मशीनें लगभग ठप हैं.

नगदी की कमी का असर रोजमर्रा के लेन-देन और खरीद-बिक्री पर पड़ा है. इस संकट की मार सबसे अधिक आम लोगों को झेलना पड़ रही है. देश की आबादी का बड़ा हिस्सा सामान्यतः नगदी से काम चलाता है. कार्डों और स्मार्ट फोन के जरिये होनेवाला विनिमय बड़े शहरों तक ही है. देश के अनेक क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं भी संतोषजनक नहीं हैं.

ऐसे में सरकार को ऐसे उपाय करने चाहिए थे कि अफरातफरी के हालात न पैदा हो सकें. कम-से-कम बैंकों और एटीएम मशीनों तक पर्याप्त नगदी की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए थी. इस परेशानी को दूर करने को प्राथमिकता देने की जरूरत है. हटाये गये बड़े नोट नगदी का 86 फीसदी भाग हैं. इससे बैंकिंग तंत्र पर भारी दबाव स्वाभाविक है. वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, शनिवार दोपहर तक बैंकों में सात करोड़ से अधिक बार लेन-देन हुआ है.

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