मायावती की सोच में राजनीतिक लचीलापन नहीं है. वह बहुजन समाज पार्टी को अपनी निजी जायदाद समझ कर काम कर रही हैं. यही वजह है कि 4 बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री रहने के बाद भी उनको राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं माना जाता. राष्ट्रीय राजनीति में उनकी तुलना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कमतर की जाती है. दलित वर्ग जैसे बड़े वर्ग की नेता होने के बाद भी करीब 30 साल की राजनीति में वह उत्तर प्रदेश से बाहर अपना प्रभाव नहीं बना पाई.

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