बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती को लगता है कि ‘दलित एक्ट’ और ‘प्रमोशन में आरक्षण’ जैसे मुद्दों ने दलितो को एकजुट कर दिया है. ऐसे में अगर वह कांग्रेस के साथ समझौता करके चुनाव लड़ेंगी तो उनको नुकसान होगा. बसपा प्रमुख मायावती ने न केवल कांग्रेस से दोस्ती तोड़ी बल्कि ठाकुर जाति दिग्विजय सिंह को उसका जिम्मेदार ठहरा दिया. जिससे दलित बिरादरी में सवर्ण विरोध को हवा दी जा सके. सवर्ण विरोध के नाम पर मायावती ठाकुर विरोध ही करती रही हैं. अब मायावती ब्राहमण-दलित सोशल इंजीनियरिंग की बात नहीं करती हैं. एक बार फिर से वह इन चुनावों में ‘दलित-मुसलिम गठजोड़’ को ही साथ लेना चाह रही हैं.

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