वह पाकिस्तान है जहाँ की राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है.पाकिस्तान में यह चर्चा भी आम है कि सुप्रीम कोर्ट ने इमरान के विदेश भाग जाने का रास्ता खोल दिया है. ठीक वैसे ही जैसे कभी शाहबाज खान के लिए खोला था. उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी पाकिस्तान में इलाज के लिए लेकिन वे इलाज के लिए लंदन जो गए तो तभी लौटे जब इमरान अपदस्थ हुए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर इमरान खान अस्पताल में रहें या फिर जेल में रहें सोचने उनके पास बहुत ज्यादा कुछ होगा नहीं. जेल में इमरान कई बीमारियों से ग्रस्त और त्रस्त थे उनमें से एनजायटी खास है जिसका पैमाना लेबल थ्री तक जा पहुंचा था.
साल 2023 के इसी अगस्त के महीने में इमरान को भ्रष्टाचार के मामलों में हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था जहाँ उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी. इमरान की बहन डाक्टर उजमा खान ने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की थी कि इनके भाई को आँखों की बीमारी है और सेहत बहुत ख़राब है जो जेल में तो सुधरने से रही लिहाजा उन्हें शिफा इंटर नेशनल अस्पताल में शिफ्ट किया जाए. जिससे उनका इलाज हो सके ..इमरान की शिफ्टिंग के लिए लामबंद वकीलों की टीम में सदर लतीफ़ और उजैर करामत भंडारी जैसे नामी वकील शामिल थे.
73 साल का एक शख्स जेल में हो याकि अस्पताल में फुर्सत में क्या क्या क्या सोच सकता है. अपने बचपन के बारे में .स्कूल कालेज के बारे में, पेरेंट्स और भाई बहनों के बारे में , अपनी जमीन जायदाद के बारे में या सेहत के बारे में. मुमकिन है वह यही सब सोचे लेकिन वह शख्सियत इमरान खान हो तो उनके लिए सोचने के लेबल पर ये फिजूल की बातें हैं. इमरान सोचेंगे यह कि कैसे इलाज के लिए विदेश जाने का दांव खेला जा सकता है.और खाली वक्त में वे क्रिकेट के बारे में थोडा बहुत सोच सकते हैं और इसके बाद के खाली वक्त में वे सोच सकते हैं अपने अफेयर्स रोमांस और तीन अदद बीबियो के बारे में.
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