International News: सीरिया में 2011 से जो युद्ध चला उसने सिर्फ शहरों को मलबे में नहीं बदला बल्कि लोगों के घर, रिश्ते और जिंदगी का हिसाब भी बिगाड़ दिया. शहर के शहर तबाह हुए, लाखों औरतें विधवा हुईं और सामाजिक तानाबाना टूट गया. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर आजकल एक खबर बहुत वायरल है कि सीरिया में 70 फीसदी महिलाओं को शादी के लिए पुरुष ही नहीं मिल रहे और हर एक पुरुष से चार-चार महिलाएं शादी कर रही हैं. सुनने में ये बात चौंकाने वाली लगती है लेकिन सच्चाई इससे भी कहीं ज्यादा दर्दनाक है.
संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक सीरिया में जेंडर रेशो लगभग 1002 पुरुष प्रति 1000 औरतें हैं. अमेरिका के Census Bureau का 2026 का अनुमान भी यही कहता है कि सेक्स रेशो करीब 1009 पुरुष प्रति 1000 महिलाएं है. यानी पूरे देश में पुरुष इतने कम नहीं हुए हैं कि 70 फीसदी औरतों के लिए साथी ही न बचे. अगर पूरे देश का हिसाब देखा जाए तो पुरुषों की संख्या महिलाओं से बस थोड़ी ज्यादा ही है इसलिए 70 फीसदी महिलाएं बिना शादी रह गईं वाला दावा गलत है.
फिर ये अफवाह इतनी क्यों फैली. इसकी वजह सीरिया का दर्द है, आंकड़े नहीं. 2011 के बाद लाखों लोग मारे गए, घायल हुए और लापता हो गए. 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अब भी करीब 1.5 से 1.7 लाख लोग लापता हैं. इनमें बड़ी संख्या पुरुषों की है. बहुत से युवा पुरुष रोजगार की तलाश में लेबनान, तुर्की और यूरोप चले गए और बहुत से युद्ध में मारे गये. इसका नतीजा ये हुआ कि कुछ खास इलाकों और कुछ खास उम्र की औरतों के लिए शादी करना मुश्किल हो गया.
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