सत्ता का अंहकार और सांमतशाही व्यवस्था ‘त्रेतायुग’ में भी थी और ‘कलयुग’ में भी है. ‘त्रेतायुग’ की तारीफ करने वाली भाजपा मजदूरों को उसी युग में वापस ले जाना चाहती है जिससे वह शहरी जीवन से निकल कर वापस गांव चले जहां पर जमींदारों के खेतों पर काम करे और उनके शोषण का शिकार हो सके. वर्णव्यवस्था में यकीन करने वाली भाजपा वापस उसी युग में मजदूरो का ले जाना चाहती है जहा पर वह अपनी मेहनत के नहीं बल्कि भाग्य को ही प्रमुख मानते थे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालत को मजदूर के त्याग और तपस्या से जोडा था.

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