हिन्दी पट्टी के जिन तीन अहम राज्यों में कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली, उनमें कल तक नरेंद्र मोदी के खिलाफ बोलना किसी ईश निंदा से कम नहीं माना जाता था. इन्हीं राज्यों से साल 2013 से मोदी लहर शुरू हुई थी जो 2014 में एक आंधी में तब्दील हो गई थी. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो सालों बाद कांग्रेसी सरकारें हैं और लोग खुलकर बोलने लगे हैं. लोकतंत्र के असल माने भी यही हैं कि जनता अपनी बात बिना किसी डर के कहे, लेकिन हो यह रहा था कि किसी की हिम्मत नरेंद्र मोदी के बेतुके फैसलों पर भी अपनी राय या प्रतिक्रिया देने तक की नहीं पड़ रही थी.

Tags:
COMMENT