जिन 3 राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं उन में सत्तारूढ़ भाजपा सब से कमजोर राजस्थान में पड़ रही है.

5 साल महल की राजनीति करती रहीं मुख्यमंत्री वसुंधराराजे सिंधिया को समझ नहीं आ रहा है कि वे मतदाताओं को अपनी कौन सी उपलब्धियां बता कर रिझाएं. इन दिनों राजस्थान गौरवयात्रा पर राजसी ठाठ से निकलीं वसुंधरा को हर किसी के विरोध का सार्वजनिक सामना करना पड़ रहा है. बेरोजगार युवक और कई कर्मचारी संगठन खुल कर महारानी का विरोध कर रहे हैं.

ऐसे में वसुंधरा वही कर रही हैं जो आमतौर पर खीझ में किया जाता है. राजस्थान के मुसलिम नाम वाले गांवों का हिंदूकरण करना उन्होंने शुरू कर दिया है. मसलन, अब बाड़मेर जिले का मियां का बाड़ा नाम का गांव महेश नगर कहलाएगा. बेरोजगार, दलित, किसान और मुसलमान इस शर्त पर भाजपा को वोट देंगे, ऐसा कहने और सोचने की कोई वजह नहीं क्योंकि उन की परेशानियों का हल भगवाकरण से तो होने से रहा.

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