विषय तो शोध का है कि अपने से ज्यादा, किराए के मकान से लोगों को इतना लगाव क्यों होता है कि उसे खाली करते वक्त किराएदार का मोह तरहतरह से व्यक्त होता है. मकान सरकारी हो तो उसे भवन कहना ही बेहतर होगा जिस की शानोशौकत को शब्दों में बांधना अपनेआप में नादानी वाली बात होती है.

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