जब से गौरक्षा के नाम पर खुलेआम इंसानों के कत्लेआम का सिलसिला शुरू हुआ है तब से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री व पर्यावरणप्रेमी मेनका गांधी का भी पशुपक्षियों से मोह भंग हो चला है. वे ऐसे बयान देने लगी हैं जो हकीकत और आंकड़ों से दूर होते हैं. ऐसे में उन पर हल्ला भी खासा मचता है.

मेनका का ताजा बयान है कि पुरुष, स्त्रियों से कम आत्महत्या करते हैं. उन्होंने यह बात पूरी भी नहीं कि थी कि लोगों ने आंकड़े थाल में सजा कर पेश कर दिए कि साल 2015 में देश में आत्महत्या के कुल 1,33,623 मामले दर्ज हुए थे जिन में से 91,428 पुरुष थे. मेनका का इशारा अगर घरेलू हिंसा और प्रताड़ना जैसे प्रसंगों पर था तो भी पुरुष महिलाओं पर भारी पड़े थे. 86,808 विवाहितों में पुरुषों की संख्या 64,534 थी. सार यह है कि पुरुष स्त्री से कहीं ज्यादा त्रस्त, भावुक और प्रताडि़त हैं.

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