Mumbai Pune Expressway: महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के "मिसिंग लिंक" प्रोजेक्ट को मॉडर्न इंजीनियरिंग का चमत्कार बताया था. लगभग 7 हजार करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन 1 मई 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़े उत्साह के साथ किया था. दावा किया गया था कि इससे यात्रा तेज, सुरक्षित और ज्यादा भरोसेमंद साबित होगी लेकिन उद्घाटन के करीब नौ सप्ताह बाद ही पहली मानसूनी बारिश में प्रोजेक्ट का एक हिस्सा लैंडस्लाइड की चपेट में आ गया. टनल के पास का रिटेनिंग वॉल बुरी तरह डैमेज हो गया. इससे सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें आ गईं और मुंबई जाने वाला रास्ता बंद करना पड़ा. हजारों यात्रियों को पुराने मार्ग से भेजना पड़ा.
सरकार का कहना है कि यह "प्राकृतिक आपदा" थी और मेन टनल को इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है लेकिन सवाल यह है कि अगर यह इलाका पहले से लैंडस्लाइड जोन था तो क्या इस बात को ध्यान में रखकर ही इंजीनियरिंग नहीं की जानी चाहिए थी? आखिर रास्ता बंद ही क्यों करना पड़ा? क्या भविष्य में होने वाले ऐसे लैंडस्लाइड से यह टनल पूरी तरह सुरक्षित भी हैं?
भाजपा बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों के उद्घाटन को बड़ा इवेंट बनाकर पेश करती है होर्डिंग लगते हैं, टीवी पर लाईव प्रचार चलता है, नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ इसे अख़बारों के मेन पेज पर छापा जाता है लेकिन कुछ समय बाद असलियत सामने आ जाती है. कहीं नये बने पुल धड़ाम से गिरते हैं तो कहीं हाइवेज में बड़े बड़े गड्ढे दिखाई देने लगते हैं.
बीजेपी यह बात नहीं समझती की जनता के टैक्स के पैसों से बने किसी मेगा प्रोजेक्ट की असली परीक्षा सिर्फ उद्घाटन नहीं, बल्कि उसका वर्षों तक सुरक्षित और भरोसेमंद ढंग से चलना भी है. अगर करोड़ों रुपये खर्च होने के कुछ ही सप्ताह बाद इतनी बड़ी दुर्घटना हो जाये तो निर्माण की क़्वालिटी, निगरानी, डिजाइन और जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
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