क्यों तुम्हारी आंखों में

तूफान उमड़ आया है

क्या किसी ने फिर

यादों के झरोखे पे खटखटाया है?

 

जो फूल दिया था उस ने कभी

खिलाखिला, महकामहका

क्या वही सूखा हुआ

किताब में निकल आया है?

 

जो तराना उस ने सुनाया था कभी

किसी पेड़ के नीचे

क्या वही पास से गुजरते

किसी ने गुनगुनाया है?

 

जो डोर बांधी थी कसमों की, वादों की, साथ में उस डाल पर

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