बौलीवुड में छोटे व करेक्टर आर्टिस्टों के मुकाबले कहीं ज्यादा पैसा स्टार कलाकारों के स्टाफ को दिए जाने का मुद्दा गरमाता जा रहा है. फिल्मों के लिए कलाकारों का चयन करने वाले मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा के साथ बतौर एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत आकाश दहिया तीस से अधिक फिल्मों के लिए कास्टिंग कर चुके हैं.

इतना ही नहीं वह अब तक ‘कमीने’,‘चिल्लर पार्टी’,‘साहब बीबी गैंगस्टर’, ‘फोर्स’, ‘रॉक स्टार’, ‘डी डे’, ‘हाइवे’, ‘बॉबी जासूस’, ‘पीके’, ‘मेरठिया गैंगस्टर’ और ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं. पर छोटे व करेक्टर आर्टिस्टों की पारिश्रमिक राशि के मुद्दे पर वह खुलकर बात करते हैं.

पारिश्रमिक राशि के मुद्दे पर आकाश दहिया कहते हैं-‘‘बौलीवुड में सही मायनों में कलाकार को पैसा एक खास मुकाम पर ही मिलता है. और जब कलाकार को अच्छा पैसा मिलता है, तो उसके पूरे स्टाफ को अच्छा पैसा मिलता है. आप शायद यकीन न करें, पर स्टार कलाकार के स्टाफ को हम करेक्टर आर्टिस्टों से कहीं ज्यादा पैसा मिलता है. मैंने देखा है कि तीस तीस हजार रूपए स्टार कलाकार के स्टाफ को मिल रहे हैं. स्टार के ट्रेनर को अच्छे पैसों के साथ साथ रहने के लिए फाइव स्टार होटल मिलता है.

एक कलाकार,जिसके पीछे निर्देशक लड़ाई कर रहा होता है कि फिल्म में छोटा किरदार है, पर मुझे इसके लिए अच्छा कलाकार चाहिए, उस कलाकार को अच्छे पैसे नहीं मिलते हैं. मैं एसोसिएट कास्टिंग डायेरक्टर के रूप में काम करता हूं. यानी कि कास्टिंग से जुड़ा हुआ हूं. तो मैंने देखा है कि कास्टिंग के वक्त निर्देशक हमसे कहता है कि उसे फलां किरदार के लिए अच्छा कलाकार चाहिए.

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