जैन धर्म में आचार्य विध्यासागर की वही पूछपरख और हैसियत है, जो सनातन धर्म में शंकराचार्य, इस्लाम में पैगम्बर, क्रिश्चियन में पोप, सिक्खों में गुरुनानक और दलितों में रविदास की है. विध्यासागर इन दिनो भोपाल के हबीबगंज जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे हैं, उन्हे सुनने और देखने देश भर से श्रद्धालु उमड़ रहे हैं. इनमे आम लोगों के अलावा नेताओं की तादाद भी ख़ासी है, जिनका एक अहम मकसद जैन समुदाय के लोगों को खुश करना भी है, क्योंकि अपनी व्यापारिक बुद्धि के लिए पहचाने जाने वाले जैनी चुनावों में दिल खोलकर चंदा देते हैं और हवा का रुख पलटने में भी माहिर हैं.

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