मध्य प्रदेश में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के पद पर दोबारा मौजूदा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का चुनाव हुआ, तो सभी ने राहत की सांस ली. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी इस कोशिश में कामयाब रहे कि चुनाव की नौबत ही न आए. अगर ऐसा होता, तो तय है कि भाजपा की फूट भी उजागर हो जाती.अध्यक्ष बनने के बाद नंदकुमार सिंह चौहान और शिवराज सिंह चौहान दोनों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से आशीर्वाद लेते हुए यह दिखाने की कोशिश की कि ‘दीदी’ की रजामंदी भी इस चुनाव में थी. अब इन दोनों की नजर मैहर विधानसभा चुनाव सीट के उपचुनाव पर है. शिवराज सिंह चौहान के पीछे दिल्ली में कौन है, इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के लिए अब लोगों को कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दीदी हैं न.

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