समाजवादी पार्टी को ‘प्रो-मुस्लिम’ बता कर भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनावों में आपस में ही ‘नूरा कुश्ती’ करना चाहती है. भाजपा को जीत के लिये जातीय ध्रुवीकरण की जगह पर धार्मिक ध्रुवीकरण लाभदायक लग रहा है. ‘प्रो-मुसलिम’ का ठप्पा लगने के बाद सपा के खिलाफ एक माहौल तैयार हो जाता है.

इसके अलावा भाजपा को अखिलेश सरकार के सत्ता विरोधी मतों से भी लाभ होता दिख रहा है. केवल भाजपा ही सपा से सीधा मुकाबला नहीं चाहती बल्कि सपा भी यही चाहती है.

सपा-भाजपा आपस में ‘नूरा कुश्ती’ करके बसपा कांग्रेस को चुनावी जंग से बाहर कर देना चाहती है. सपा को लगता है कि उसकी ‘प्रो-मुस्लिम’ छवि के चलते मुसलिम वोट बैंक उसको वोट देगा. जो चुनाव में निर्णायक हो सकता है.

अगर बसपा या कांग्रेस भाजपा से मुकाबला करते दिखेगी तो मुस्लिम वोटर उधर जा सकता है. जो सपा के लिये मुफीद नहीं होगा. यही वजह है कि बहुत सारे विरोध के बाद भी सपा मुख्तार अंसारी के दल से समझौता करना चाहती है.

भाजपा की रणनीति है कि सपा अपना ‘प्रो-मुस्लिम’ कार्ड खेले जिससे हिन्दू वोटर एकजुट होकर भाजपा को वोट करे. लोकसभा चुनाव में भाजपा को यह लाभ मिल चुका है. कश्मीर मुद्दा इस बात को और मजबूत करेगा. केन्द्र सरकार पाकिस्तान के साथ इस तरह की बयानबाजी जारी रखेगी जिससे हिन्दू भाजपा के पक्ष में एकजुट रहे. सपा भाजपा असल में ‘प्रो-मुस्लिम’ और ‘एंटी -मुस्लिम’ राजनीति पर ही चुनाव लड़ना चाहते हैं.

भाजपा को लगता है कि अगर जातीय ध्रुवीकरण पर चुनाव लड़े गये तो उसे नुकसान होगा. दलित बसपा के साथ और सवर्ण कांग्रेस के पक्ष में जा सकता है. ऐसे में यह जरूरी है कि पूरी चुनावी लड़ाई धार्मिक आधार पर लड़ी जाये.जिसमें पाकिस्तान और राष्ट्रवाद जैसे मुददे भी तड़का लगाने के काम आये.

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
  • समाज और राजनीति से जुड़ी समसामयिक खबरें
COMMENT