चुनाव के मौसम में टीवी से लेकर अखबारों तक में चुनावी खबरें पूरी तरह से छाई रहती हैं. जिसको देखकर लगता है जैसे चुनाव के समय समाज में अपराध होने कम हो गये हों. हकीकत यह है कि अपराध कम नहीं होते, अखबार में उसको जगह मिलनी कम हो जाती है. थानों की पुलिस चुनावी कराने में लग जाती है, जिससे घटनाओं का खुलासा कम होता है. चुनाव के मौसम में अखबारों में आधे से अधिक पेज चुनावी खबरों में रंग जाते हैं. अखबारों के संवादादाताओं को चुनावी खबरों, लेख, रिपोर्टिग, इंटरव्यू में लग जाना पड़ता है.

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