हवाई यात्रा मे लागू होने वाले ‘फ्लैक्सी फेयर’ को रेल के सफर में लागू कर केन्द्र सरकार रेल के सफर को हवाई जहाज के सफर का अनुभव कराना चाहती है. बिना टैक्स का रेल बजट पेश कर वाहवाही लूटने वाले रेलमंत्री सुरेश प्रभु को जब साल भर रेल के टिकट बढाने है तो रेल बजट बेमानी हो जाता है. 7 वें वेतनमान का लाभ तो केवल कुछ प्रतिशत सरकारी नौकरों को ही मिलने वाला है. केन्द्र सरकार इसका बोझ सभी पर डालना चाहती है.

‘फ्लैक्सी फेयर’ इसकी पहली सीढी है. जिसे भारतीय रेलवे फिलहाल राजधानी, शताब्दी और दुरंतों में लागू कर रही है. धीरे धीरे यह ‘फ्लैक्सी फेयर’ सभी ट्रेनों में लागू होगा. यह ठीक वैसे ही धीरे धीरे किया जायेगा जैसे केन्द्र सरकार रसोई गैस यानि एलपीजी सब्सिडी को लेकर कर रही है. एलपीजी सब्सिडी में केन्द्र सरकार ने सबसे पहले जनता से सब्सिडी छोडने की अपील की. अब 10 लाख सालाना कमाई वालों की सब्सिडी वापस लेने की योजना है. इसके बाद 5 लाख सालाना कमाई वालों की एलपीजी सब्सिडी वापस की जायेगी. धीरे धीरे सरकार एलपीजी सब्सिडी को खत्म कर देगी.

ट्रेनों के टिकट में ‘फ्लैक्सी फेयर’ की मार केवल मध्यम वर्ग पर पड रही है. एक्जक्यूटिव क्लास और एसी सेकेंड और फर्स्ट क्लास में यात्रा करने वालों पर ‘फ्लैक्सी फेयर’ का बोझ नहीं डाला गया है. ‘फ्लैक्सी फेयर’ का मतलब यह होता है कि ट्रेन में जैसे जैसे सीटे कम होंगी वैसे वैसे उनका किराया बढेगा. मतलब यह है कि जो टिकट पहले 100 रूपये में मिला वही बाद में 150 रूपये हो जायेगा. 9 सितबंर से लागू इस योजना का भार पहले बुक हो चुकी टिकट पर नहीं पड़ेगा. टिकट की गणना इस प्रकार होगी कि अगर किसी ट्रेन में 100 सीटे हैं, तो 10 सीटों का किराया सामान्य होगा. इसके बाद हर 10 सीट पर यह रेट बढ़ता जायेगा. यह अधिक से अधिक डेढ गुना हो सकता है.

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