उत्तर प्रदेश की कामयाबी का भाजपा का नशा अगर पंजाब में उतरता दिखाई दिया तो इससे ये तथ्य तो स्थापित होते हैं कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कोई राष्ट्रीय या दूसरी लहर नहीं थी और राज्यों में सिर्फ सत्ता विरोधी लहर चली है. आम तौर पर लोग अपने अपने राज्यों की सरकारों के कामकाज से संतुष्ट नहीं रहते, भाजपा ने इसका फायदा अगर खासतौर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उठाया तो पंजाब में इसका खामियाजा भी उसे भुगतना पड़ा. शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन खारिज कर दिया गया है और वोटर ने कांग्रेस पर भरोसा जताया है तो बात  हैरत की इस लिहाज से भी है कि वहां सत्ता की प्रबल दावेदार आम आदमी पार्टी एक बेहतर विकल्प के रूप में थी, पर धाकड़ कांग्रेसी नेता केप्टन अमरिंदर सिंह की जमीनी पकड़ कांग्रेस के काम आई.

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