लोग बाबू राव स्टाइल का मसखरा ही न समझते रहें इसके लिए अभिनेता और सांसद परेश रावल को जरूरी लगने था कि वे भी ऐसी कोई बात कहें जो बुद्धिजीवियों जैसी लगती हो. इससे भी आसान रास्ता उन्हें यह लगा कि बेहतर और शॉर्ट कट तो यह है कि किसी बुद्धिजीवी की आलोचना कर दी जाये. इससे मीडिया इस बात का प्रचार प्रसार कर देगा कि परेश रावल भी मुख्य धारा से जुड़े हुये हैं.

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