जब तक गोमांस को ले कर वोट का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो रहा था, भारतीय जनता पार्टी को इस में लाभ नजर आ रहा था. भाजपा के लिए वोट का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण लोकसभा में लाभकारी साबित हो चुका था. ऐसे में पार्टी गोमांस के नाम पर वोट के सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में लगी थी. जब गोरक्षा के नाम पर दलित वर्ग पर हमला होना शुरू हुआ तो भाजपा की चिंता बढ़ गई. केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद भजभज मंडली के लोगों ने कई तरह

से अपने काम को आगे बढ़ाने की शुरुआत की थी. गोरक्षा इस में से एक  था. देश में बहुत पहले से दलित वर्ग की कुछ जातियां मरे जानवरों की खाल निकाल कर बेचने का काम करती रही हैं. ऐसे में अब गोरक्षा के नाम पर इन जातियों को निशाना बनाया जाने लगा है. गुजरात और मध्य प्रदेश की घटनाओं ने पूरे देश के सिर को शर्म से झुकाने का काम किया है. देश के प्रधानमंत्री को इस में हस्तक्षेप करना पड़ा. मामला बिगड़ता देख भाजपा ने गुजरात में सत्ता परिवर्तन कर दिया. आनंदी बेन पटेल को हटा कर विजय रूपानी को गुजरात का मुख्यमंत्री बना दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि गोरक्षा के नाम पर चल रही दुकानें बंद हों. जो लोग दलितों को मार रहे हैं वे उन को नहीं, मुझे गोली मार दें पर इस बयान में वे उन गोरक्षकों को बचा गए जो पार्टी या संघ के लिए कार्य कर रहे हैं. उन्होंने ठीकरा उन पर फोड़ा जो दिन में गुंडई कर रहे हैं. जाहिर है ये गुंडे पार्टी या संघ से जुड़े होंगे, यह तो नरेंद्र मोदी मानेंगे नहीं. प्रधानमंत्री का यह बयान इतना ही बताता है कि गोरक्षा के नाम पर तमाम तरह के अत्याचार हो रहे हैं. पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव आ रहे हैं. पंजाब में गोरक्षा के नाम पर तमाम तरह के बवाल मचे हैं.

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