वे लोग वाकई अतिदूरदर्शी व ज्ञानी हैं जो यह कह रहे हैं कि लालकृष्ण आडवाणी या मुरली मनोहर जोशी अब राष्ट्रपति नहीं बन पाएंगे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन सहित 13 अन्य लोगों पर साजिश का मुकदमा चलाने का फैसला दिया है. इन में एक और अहम नाम साध्वी उमा भारती का भी है, जिन्होंने उम्मीद के मुताबिक बड़ी मासूमियत से कहा कि जो था खुल्लमखुल्ला था, कोई साजिश नहीं थी. अव्वल तो उमा का सार्वजनिक रूप से दिया गया यह बयान ही यह जताने के लिए काफी है कि सचमुच उस दिन अयोध्या में कोई साजिश नहीं हुई थी, अब यह तो अदालत की दरियादिली या मजबूरी है कि वह किसी फैसले पर पहुंचने के लिए चार्जशीट, गवाह और सुबूतों वाला नाटक खेले और इस ऐतिहासिक मुकदमे का अंत करे.

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