आज की इस भागती दौड़ती जिंदगी में सभी व्यस्त हैं. दूसरों के लिए तो छोडि़ए लोगों के पास खुद के लिए भी वक्त नहीं. ऐसे में ‘फैमिली टाइम’ जैसे शब्द व्यर्थ से लगते हैं. लेकिन अपनी धुन मग्न लोगों को यह नहीं पता कि परिवार के साथ वक्त बिताना जिंदगी में कितनी सकारात्मकता भर देता है. खासतौर पर यदि फैमिली के साथ बैठ कर रात का भोजन किया जाए और भोजन के दौरान अपनी दिनचर्या को परिवार के दूसरे सदस्यों संग साझा किया जाए तो कई समस्याओं का हल या उन से निपटने के नए रास्ते मिल जाते हैं.
परिवार के बड़े सदस्यों के संग ही छोटे सदस्यों के लिए भी ‘फैमिली डिनर’ काफी फायदेमंद होता है. यूनिवर्सिटी औफ फ्लौरिडा द्वारा की गई रिसर्च में भी बताया गया है कि हफ्ते में 4 बार किया गया फैमिली डिनर बच्चों की मानसिक विकास के लिए बहुत फायदेमंद है. इस के साथ ही रिसर्च में ‘फैमिली डिनर’ को मोटापे जैसी बीमारी की रोकथाम के लिए भी जरूरी बताया है.
आइए ‘फैमिली डिनर’ के फायदों पर डालते हैं एक नजरः
· फैमिली डिनर यानी पारिवारिक बातों को कहने का बहाना. इस बहाने परिवार के छोटे से ले कर बड़े तक सभी सदस्य अपने मन की बात को आपस में साझा कर सकते हैं. इस से सदस्यों को कई बार कुछ नया जानने और सीखने को मिलता है. खासतौर पर कम बोलने वाले सदस्यों को इस समय अधिक बोलने का मौका देने से उन की हिचकिचाहट दूर होती है.
· डिनर के दौरान होने वाली चर्चा में जब परिवार के दूसरे सदस्य भी हिस्सा लेते हैं तो किसी के साथ होने और एक अलग सी सुरक्षा का अहसास होता है. साथ ही ‘फैमिली डिनर’ पारिवारिक अनुशासन को बनाए रखने में भी मददगार होता है. ‘फैमिली डिनर’ में घर के छोटे से ले कर बड़े तक सभी लोग हिस्सा लेते हैं, जिस से सभी को अपने दायरे पता होते हैं कि क्या बात किस लहजे में करनी चाहिए.
· ‘फैमिली डिनर’ में यदि फैमिली के सभी सदस्यों को डिनर की तैयारी का कोई न कोई काम सौंप दिया जाए तो सदस्यों को एकदूसरे के नजदीक आने और एकदूसरे को समझने का मौका मिलता है.
· अकेले भोजन करने में आप का फोकस सिर्फ भोजन पर होता है इस लिए आप खाते वक्त बहुत कौनशियस रहते हैं कि क्या खाऊं और क्या नहीं ज्यादातर लोग ऐसे में सेहत की जगह स्वाद को महत्त्व देते हैं और वही खाते हैं जो उन की टेस्ट बड को अच्छा लगता है. इस के अतिरिक्त कई बार अकेले खाने से लोग बेहिसाब खाना खा जाते हैं जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है.
· कई बार परिवार के सदस्यों के मध्य मतभेद उत्पन्न हो जाते हैं और इस स्थिति में वो सब से पहले साथ बैठ कर भोजन करना छोड़ देते हैं जबकि मतभेद होने के बाद भी साथ बैठ कर भोजन किया जाए तो मसले के सुलझने के बहुत मौके होते हैं.
· अकेले डिनर करने वाले लोग परिवार के साथ डिनर करने वालों से कम और्गेनाइज्ड होते हैं. उन्हें जब, जहां और जिस हाल में खाना मिल जाए खा लेते हैं. जबकि खाने को सलीके और आराम से खाया जाए तब ही वो सेहत के लिए फायदेमंद होता है.
· फैमिली डिनर आप की आर्थिक स्थिति पर भी असर डालता है. यदि परिवार का हर सदस्य अलगअलग वक्त पर भोजन करता है तो उतनी ही बार भोजन को गरम करना पड़ेगा. भोजन को या तो गैस या माइक्रोवेव में ही गरम किया जाएगा इसलिए यह आप के खर्चे बढ़ाएगा. साथ ही रीहीटेड भोजन करने से सेहत खराब होगी तो डाक्टर की फीस का खर्चा भी बढ़ेगा.