इन दिनों बाजार में गाय के घी का बुखार बेवजह नहीं चढ़ा है, बल्कि यह एक प्रायोजित षड्यंत्र है जिस के तहत गाय के घी का गुणगान अमृत की तरह किया जा रहा है. गाय को ले कर राजनीति तो और ज्यादा गरमा ही रही है, साथ ही, मौब लिंचिंग भी आम हो चली है यानी हर स्तर पर गाय की ब्रैंडिंग जारी है, भले ही वह वादविवाद और हिंसा की शक्ल में हो, लेकिन है.

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