Working Woman Issues: परिवार से दूर रहने के कारण किसी से खुल कर बात नहीं कर पाती. मैं (उम्र 26 वर्ष), गुरुग्राम में जौब करती हूं और अकेली रहती हूं. बाहर से देखने पर सब ठीक लगता है अच्छी नौकरी, दोस्त, सोशल लाइफ लेकिन अंदर से अकसर खालीपन महसूस होता है. रात को नींद नहीं आती, छोटीछोटी बातों पर रोना आ जाता है. मन में डर रहता है कि कहीं लोग मुझे कमजोर न समझे. क्या यह सिर्फ थकान है या कुछ और? मैं अपने मन की सेहत का खयाल कैसे रखूं?
जो आप महसूस कर रही हैं, वह आज के तेज रफ्तार शहरी जीवन में बहुत आम है और यह कमजोरी नहीं, आप के मन का मदद मांगने का तरीका है. बाहर से सब ठीक दिखना और भीतर से खालीपन महसूस होना इस बात का संकेत हो सकता है कि आप लंबे समय से भावनात्मक थकान, अकेलेपन या दबे हुए तनाव को ढो रही हैं. लगातार नींद न आना, छोटीछोटी बातों पर रोना आना और मन का भारी रहना ये साधारण थकान से आगे के संकेत हो सकते हैं. यह जरूरी नहीं कि यह कोई बड़ी बीमारी हो, लेकिन यह बताता है कि आप की मैंटल हैल्थ को अभी ध्यान और सहारे की जरूरत है.
सब से पहला कदम है अपनी भावना को स्वीकार करना. किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य से बात करें. अगर संभव हो तो किसी काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना भी मददगार होता है. यह उपचार नहीं, आत्मदेखभाल का हिस्सा है. अपने लिए छोटेछोटे मैंटल ब्रेक तय करें. रोज 10 मिनट बिना मोबाइल के खुद से जुड़ना, थोड़ी देर टहलना, डायरी में मन की बात लिखना. मन की सेहत भी उतनी ही अहम है जितनी शरीर की. समय पर ध्यान देने से बड़ी मानसिक परेशानियों से बचा जा सकता है.
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