बिजनेस में औफर का सहारा आमतौर पर औफ सीजन में लिया जाता था. हर बिजनेस का एक औफ सीजन होता है. कारोबारी हमेशा से ही फेस्टिव सीजन को लेकर बहुत उत्साहित रहता है. उसे उम्मीद रहती है कि फेस्टिव सीजन में उसकी अच्छी कमाई हो जायेगी. जिससे औफ सीजन में कुछ लुभावने औफर के सहारें उसका बिजनेस चलता रहेगा. पितृपक्ष के पहले से फेस्टिवल सीजन शुरू होता है. पितृपक्ष में खरीददारी लोग कम करते हैं इसके बाद वापस खरीददारी का समय शुरू हो जाता है. पितृपक्ष के पहले गणेश उत्सव से ही फेस्टिवल माना जाता है. गणेश उत्सव में जिस बिजनेस की उम्मीद की जा रही थी वह इस बार नहीं दिखा है. गणेश उत्सव में भी बिजनेस का बढ़ाने के लिये औफर का सहारा लेना पडा. फैशन डिजाइनिंग स्टोर चलाने वाली नेहा दीप्ति कहती हैं ‘इस बार औफर के सहारे ही पूरा समय गुजर रहा है. बड़े- बड़े स्टोर में भी औफर लगा रहा. ऐसे में अब फेस्टिवल सीजन में भी औफर का ही सहारा लग रहा है.

केवल कपड़ों की दुकानों का ही यह हाल नहीं है. महिलाओं से हमेशा गुलजार रहने वाला ब्यूटी सेक्टर भी औफर की मजबूरी में फंसा है. ब्यूटी एक्सपर्ट पायल श्रीवास्तव का अपना ब्यूटी सैलून है. वह कहती है कि औफ सीजन में ब्यूटी सर्विस में औफर देने पड़ते है. पहले डिसकाउंट तक कम से कम दिया जाता था. अब बिजनेस के लिये पहले ही औफर देने पड़ रहे है.’ यही हालत ज्वैलरी बिजनेस के भी है. इन्द्रेष स्तोगी कहते हैं ‘सोना मंहगा होने से अब ज्वैलरी की खरीददारी कम होने लगी है. अभी तक लोगों को लग रहा था कि फेस्टिवल सीजन में तेजी आयेगी पर ज्वैलरी बनाने वाले से लेकर बेचने वाले तक में कोई उत्साह नहीं है. उनको लग नहीं रहा कि फेस्टिवल सीजन में बिजनेस में कोई बहुत तेजी आयेगी.‘

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