ओएमजी, यार उस लेडी की ड्रैस देख, कितनी शानदार है. लगता है किसी बड़े डिजाइनर के कलैक्शन से ली है. कम से कम 18-20 हजार रुपए की तो होगी ही. और मुझे देखो, उस के पास खड़ी हो जाऊं तो कामवाली बाई सी लगूं. दूल्हे के पास स्टेज पर खड़ी एक महिला को देखते ही सीमा ने अपनी आदत के अनुसार आह भरी. मैं ने उसे घूरा तो वह एकबारगी तो सकपका कर चुप हो गई मगर थोड़ी ही देर बाद फिर शुरू हो गई.

कभी किसी से अपने गहनों की तुलना करती तो कभी हेयर स्टाइल की. कभी अपने फुटवियर की तरफ देख कर निराशा से भर उठती तो कभी उसे अपना मेकअप डल लगता. पूरी शाम सीमा ने न तो खुद ऐंजौय किया और न ही मुझे करने दिया. उस की इन हरकतों पर मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर उस की आदत समझ कर मैं अपने गुस्से को पी गई.

सीमा को हमारे फ्रैंडसर्कल में प्रौब्लम के नाम से जाना जाता है. कारण है उस का हर वक्त रोतेबिसूरते रहना और अपनी तुलना दूसरों से कर कर के अपनेआप को बेचारी साबित करते रहना. कभी किसी की ड्रैस, कभी मेकअप, कभी गहने तो कभी किसी की परफैक्ट फिगर... सीमा के पास हीनभावना से ग्रस्त होने का कोई न कोई बहाना होता ही है.

यह समस्या केवल सीमा की ही नहीं, बल्कि हमारे आसपास ऐसी अनेक लड़कियों की है जो अपनेआप से कभी संतुष्ट नहीं होतीं. उन्हें दूसरों की थाली में हमेशा घी ज्यादा नजर आता है.

वंदना एक कालेज स्टूडैंट है. 2 घंटे डेली सोप देखना उस की दिनचर्या का प्रमुख अंग है और यही उस की परेशानी का कारण भी है. टीवी में दिखने वाले किरदारों से अपनी फिगर की तुलना करना और उन जैसा परफैक्ट बौडीशेप पाने के लिए तरहतरह के प्रयास करना व असफल होने पर हताशा से भर उठना. यह वंदना का प्रिय शगल है.

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