लोग खुशियों को प्यार या पैसे से जोड़ कर देखते हैं. मगर जीवन सिर्फ पैसा नहीं है. जीवन है हर पल को जी लेने और हमेशा अपना सर्वोत्तम देने की ख्वाहिश के बीच संतुलन का प्रयास. जब आप इस संतुलन को पा लेते हैं तो जिंदगी एक नए रूप में सामने आती है.

आज हम सब ने अपनी जीवनशैली को खुद ही बिगाड़ लिया है. हम केवल भाग रहे हैं, जी नहीं रहे. दिमाग में तनाव, मन में दूसरों से पीछे रह जाने का डर और शारीरिक निष्क्रियता के साथ गलत खानपान व दिनचर्या. ऐसे में हमारी जिंदगी हमारे ऊपर बो झ बनती जा रही है, बीमारियों और तकलीफों का घर बनती जा रही है. पैसा कितना भी कमा लें मगर उसे भोग नहीं सकते. फिर क्या फायदा इतनी भागदौड़ का? थोड़ा ठहर कर प्रकृति की खूबसूरती भी निहारिए, खुले दिल से ठहाके लगाइए और बेफिक्र लमहे भी गुजारिए. ताकि समय निकल जाने पर आप को इस बात का मलाल न रहे कि आप ने तो जिंदगी जी ही नहीं.

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अथाह संपत्ति के मालिक बिलेनियर स्टीव गोब्स की मौत 56 साल की उम्र में पैंक्रियाटिक कैंसर की वजह से हुई थी. उन के अंतिम कुछ शब्दों पर गौर करें :

‘‘दूसरों की नजरों में मेरी जिंदगी सफलता का पर्याय है. मगर यदि अपने काम को किनारे रख दूं तो मु झे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी में थोड़ी सी भी खुशी कभी रही और अब अपने अंतिम समय में मु झे इस बात का एहसास बड़ी शिद्दत से हो रहा है. धनदौलत महज एक चीज है, जिस का आदी मैं उम्रभर रहा. मगर सच्ची खुशी मैं ने कभी महसूस नहीं की.

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