भड़ास वह है जिसे निकालने पर इंसान खुद को संतुष्ट महसूस करता है. जब तक इंसान इसे बाहर नहीं निकालता, बेचैन रहता है. भड़ास कई तरह से निकलती है, कभी गुस्से में, कभी गालीगलौज से, कभी हंसीमजाक में भी.

मार्केट में किसी से टक्कर लगी, सब्जी की टोकरी गिर गई और सारी सब्जी सड़क पर बिखर गई. आप के मुंह से निकल ही गया, ‘‘अंधा है?’’ आप ने महसूस किया होगा कि इन शब्दों के निकलते ही आप के मन का गुबार कम हो गया.

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