आजकल तान्या के किसी ग्रुप में शामिल होते ही लोग धीरेधीरे खिसकने लगते हैं. उस की बात शुरू होते ही कुछ लोग काम का बहाना ढूंढ़ निकल लेते हैं, या कुछ कन्नी काटते हैं. परेशान सी तान्या मन ही मन कुढ़ती रहती है. बहुत दिनों से इस बात पर वह गौर कर रही है कि वह किसी भी ग्रुप में शामिल होती है तो लोग धीरेधीरे सभा खत्म करने की फिराक में रहते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है?

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