Mobile Addiction From Kids : रोजमर्रा की जरूरतों के साथ पूरे दिन की एक्टिविटी और महीनों की प्लानिंग मोबाइल के बिना आज पॉसिबल ही नहीं है लेकिन यह न्यू जेनरेशन के लिए खासकर बच्चों के लिए खतरनाक भी साबित हो रहा है. मोबाइल पर मुफ्त में मिला ज्ञान दरअसल मुफ्त नहीं है. इस की भारी कीमत पेरैंट्स को चुकानी पड़ रही है. जिन पेरेंट्स को अभी यह सब नॉर्मल लग रहा है आने वाले वक्त में उन्हें भी इस बात का एहसास होने लगेगा कि बच्चों के लिए मोबाइल की लत नशे की लत से ज्यादा हानिकारक है.
लौकडाउन के दौरान बच्चों की औनलाइन पढ़ाई मोबाइल के जरिये ही होने लगी. मोबाइल पर ऑनलाइन क्लासेस शुरू हुए और इस के लिए पेरेंट्स ने अपने बच्चों को अलग से मोबाइल खरीद कर दिए. इस तरह पढ़ाई के बहाने टीनएजर्स के हाथों में मोबाइल आ गया. बच्चों ने इस का दुरुपयोग शुरू कर दिया. छोटे-छोटे बच्चे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक्टिव होने लगे. मोबाइल की वजह से बच्चों में खेलने की प्रवृत्ति कम हुई है यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है.
हालांकि आज के समय बच्चों के लिए मोबाइल का उपयोग कई मामलों में जरूरी भी हो गया है लेकिन पेरेंट्स की लापरवाही से यह जरूरत कम और आदत ज्यादा हो गई है.
मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव-
० बच्चों में, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, ड्राई आईज, और मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) जैसी समस्याएं पैदा होने लगी हैं.
० रात में मोबाइल का उपयोग मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करता है, जिस से नींद न आने की समस्या बढ़ती है.
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