Orphan Child Story: दिसंबर 1960 की एक ठंडी रात थी. लंदन के एक अपार्टमेंट में कुछ दिन का एक नवजात बच्चा अकेला पड़ा मिला. पुलिस ने इस बच्चे के पेरेंट्स की तलाश शुरू की, अखबार में अपील की गई लेकिन कोई आगे नहीं आया. इस अनाथ बच्चे को स्टीवेन्सन परिवार ने गोद ले लिया और नाम रखा डेविड स्टीवेन्सन.

डेविड बड़े हुए तो उन्हें पता था कि वो अनाथ हैँ. जिनके माता-पिता का पता नहीं होता ऐसे बच्चों को फाउंडलिंग कहा जाता है. स्टीवेन्सन को गोद लेने वाले माता-पिता ने ये बात उनसे छिपाई नहीं की वे फाउंडलिंग चाइल्ड हैं. डेविड बड़े हुए, स्कूलिंग पूरी हुई, सॉफ्टवेयर इंजिनियर बने और फिर एक दिन उनकी शादी हुई. डेविड के मन में सवाल तब उठा जब डेविड के अपने बच्चे हुए. तब उन्होंने सोचना शुरू किया कि मैं आया कहां से हूं?

सालों तक डेविड को कोई सुराग नहीं मिला. वो अब पीटरबरो शहर में रहते हैं जो लंदन से करीब 75 मील उत्तर में है. फिर उनकी पत्नी जूली ने इस काम में उनकी मदद की. जूली पेशे से लोकल काउंसिलर थीं. जूली ने पुराने रिकॉर्ड से उस पुलिस अफसर का नाम ढूंढा जिसने डेविड का केस संभाला था. 17 साल पहले वो दोनों उस अफसर से मिले भी लेकिन उनके हाथ कोई सुराग नहीं मिला.

डेविड की कहानी में असली मोड़ 2025 में आया. डेविड ITV के टीवी शो Long Lost Family, Born Without Trace की टीम से मिले. इसी शो की मदद से 65 साल बाद उन्हें अपनी जन्म देने वाली मां का पता चला. उनकी मां का नाम पेट्रा था. वो 1940 में नीदरलैंड में पैदा हुई थीं. कुछ समय फ्रांस में रहीं और फिर UK में आया की नौकरी करने लगी. पेट्रा का 2010 में निधन हो चुका था. डेविड को बताया गया कि वो बहुत प्यारी महिला थीं. डेविड ने कहा कि वो अपनी पैदाइश के सच के लिए उनसे नाराज नहीं हैं. शो के दौरान डेविड नीदरलैंड जाकर अपने कुछ डच रिश्तेदारों से भी मिले. सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले डेविड स्टीवेन्सन ने भावुक होते हुए कहा “अपने जन्म देने वाले परिवार को तलाशना उनके लिए अद्भुत अनुभव था. 65 साल तक एक सवाल दिल में था, मैं कौन हूं? जवाब मिलने पर जिंदगी का एक अधूरा हिस्सा पूरा हुआ”

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