सभ्य और आधुनिक कहे जाने वाले समाज में आज बुजुर्गों की हालत बिरयानी में पड़े तेजपत्ते की तरह है. सब अपनेअपने में व्यस्त हैं. वृद्धों की व्यथा सुनने व समझने वाला कोई नहीं है, मगर ‘ठिकाना’ नामक स्वयंसेवी संस्था ने अकेलेपन के शिकार बुजुर्ग महिलाओं व पुरुषों को एक होने का मंच प्रदान कर सराहनीय कार्य किया है.

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