सुप्रिया की मां दीना पाठक और उन की बड़ी बहन रत्ना पाठक दोनों अभिनय की दुनिया में सक्रिय थीं, लेकिन सुप्रिया ने अभिनय में आने की कभी नहीं सोची थी. वे तो एक डांस टीचर बनना चाहती थीं. पर मां के कहने पर उन्होंने एक नाटक में हिस्सा लिया और अपने अभिनय के लिए वाहवाही पाई. इस के बाद तो उन के अभिनय का सफर शुरू हुआ, जो फिल्म ‘कलयुग’ (1981) से ले कर आज तक यानी फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ (2015) तक लगातार जारी रहा है. फिल्म ‘बाजार’ की दबीसहमी लड़की जो कंधे झुका कर चलती है, से ले कर फिल्म ‘विजेता’ की दबंग लड़की, जो पुरुषों के इस समाज में बराबरी से चलती है, तक के हर किरदार को बड़ी ही बेबाकी से फिल्मों में जीने वाली और बौलीवुड से ले कर छोटे परदे तक में अपनी अदाकारी का जलवा दिखा चुकीं सुप्रिया पाठक ने एक शो के दौरान अपनी अभिनय यात्रा और जिंदगी के कुछ खास लमहों को हमारे साथ बांटा. यहां पेश हैं, उस के कुछ खास अंश:

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